Learning Theories

 Theories of Learning

  1. ट्रायल एन्ड एरर थ्योरी
  2. कंडीशनल रिफ्लेक्स थ्योरी
  3. इनसाइट थ्योरी
  4. अनुकरण करके सीखना


ट्रांसफर आफ ट्रेनिंग का अर्थ



मनोविज्ञान में सीखने के मुख्य सिद्धांत (Theories of Learning) निम्नलिखित हैं


मनोविज्ञान में सीखने के मुख्य सिद्धांत और उनके प्रतिपादक

1- प्रयास एवं गलती का सिद्धांत (ट्रायल एन्ड एरर थ्योरी Trial and Error Theory) 

थार्नडाइक (Thorndike)

2- कंडीशनल रिफ्लेक्स थ्योरी (Condition Reflex Theory)

-पावलोव (Pavlov)

3- इनसाइट थ्योरी (Theories of Insight)

-गेस्टाल्ट (Gastalt)

4- अनुकरण करके सीखना (Learning by Imitation)

 हैगार्ट (Hagart)

प्रयास और गलती का सिद्धांत

 (ट्रायल एन्ड एरर थ्योरी)

 (Trial and Error Theory)  


इस सिद्धांत का प्रतिपादन थार्नडाइक (Thorndike) ने 1898 में किया था। 


किसी नए कार्य को हम तुरंत नहीं सीख पाते, सीखने की प्रक्रिया के दौरान हमें कई प्रयास करने पड़ते हैं जिसमें हम कई बार असफल भी होते हैं परंतु बार-बार प्रयास करने पर अंततः हम उस कार्य के को सही तरीके से करने की विधि सीख जाते हैं।


इस सिद्धांत का मूल यह है कि प्रत्येक कार्य को सीखने के लिए हमें बार-बार प्रयास करना पड़ता है। प्रत्येक असफल प्रयास के बाद व्यक्ति अगले प्रयास में वह पिछली गलतियों नहीं दोहराता है तथा बार बार प्रयास करने से उसकी गलतियों में कमी आती जाती है और अंततः समस्या के समाधान के सही तरीके को खोज लेता है। 

इसे परीक्षण एवं त्रुटि, प्रयत्न एवं भूल, प्रयास एवं अभ्यास का नियम भी कहा जाता है

किसी समस्या का समाधान प्राप्त करने के लिए प्रयास एवं गलती करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है । इसमें समस्या का समाधान पाने के लिए बार बार प्रयास करना पड़ता है जोकि सफलता प्राप्त होने तक जारी रहता है। 


थार्नडाइक का प्रयोग👇

थार्नडाइक ने अपने इस सिद्धांत का प्रयोग एक बिल्ली के ऊपर किया जिसमें उन्होंने एक भूखी बिल्ली को एक पिंजरे के अंदर बंद कर दिया तथा पिंजड़े के बाहर एक मांस का टुकड़ा रख दिया। भूख से व्याकुल बिल्ली उस मांस के टुकड़े को खाने के लिए बाहर आने को आतुर थी। बिल्ली बाहर आने के लिए पिंजड़े के तार को काटना, खींचना, दबाना और उछलने-कूदने जैसी क्रियाएं करने लगी। 

इन क्रियाओं को करते समय अचानक उसका पैर चिटकिनी पर पड़ गया जिससे पिंजड़े का दरवाजा खुल गया और उसने बाहर आकर भोजन प्राप्त कर लिया।

इससे तात्पर्य यह है कि कई असफल प्रयास करने के बाद बिल्ली पिंजरे का दरवाजा खोल पाई।

थार्नडाइक ने बिल्ली के व्यवहार का अध्ययन किया। जब बिल्ली को अगली बार पिंजरे में बंद किया गया तो इस बार बिल्ली पहले से कम प्रयासों में ही पिंजरे का दरवाजा खोलने में सफल हो गई। 

लगातार इस प्रयोग को दोहराया गया और हर बार बिल्ली के प्रयासों में कमी आती गई और अंततः वह एक बार में ही दरवाजे को चिटकिनी खोलकर बाहर आने का तरीका सीख गई

इस प्रयोग से प्राप्त मनोवैज्ञानिक निष्कर्षों शिक्षा एवं खेल प्रशिक्षण में निम्न उपयोगिता है

1- कोई कार्य अथवा स्किल सीखने के प्रारंभ में कई प्रयास लक्ष्यहीन वह निरर्थक प्रतीत हो सकते हैं। परंतु यह आवश्यक है कि असफल प्रयासों से हतोत्साहित हुए बिना विद्यार्थी को प्रयास जारी रखने चाहिए

2- थार्नडाइक के अनुसार सीखने (अधिगम) की प्रक्रिया में शारीरिक और मानसिक क्रियाओं का विशेष संबंध होता है। सही उद्दीपन (Stimulus) व प्रेरणा (Motivation) द्वारा विद्यार्थी के प्रयत्नों में तेजी लाई जा सकती है जैसे इस प्रयोग में भूखी बिल्ली के लिए बाहर रखा भोजन एक सशक्त उद्दीपन था। उसी प्रकार अभ्यास के दौरान विद्यार्थी के लिए उचित उद्दीपन अथवा प्रेरणा होनी चाहिए जिससे वह अपने प्रयासों में कमी ना आने दे। पुरस्कार, सम्मान, प्रशंसा आदि प्रेरणा के स्रोत हैं।


3- लगातार प्रयास करने से किभी भी आकस्मिक सफलता मिल सकती है


4- अनेक प्रयासों के बाद सफलता मिलने से छात्र को अभ्यास का महत्व समझ में आता है


5- हर असफल प्रयास के बाद छात्र अपनी गलतियों व कमियों का आकलन करता है तथा अगले प्रयास में पिछली गलतियां नहीं दोहराता है। इससे विद्यार्थी की चिंतन (thinking power) शक्ति एवं समस्या के समाधान (problem solving) क्षमता का विकास होता है।


6- यह सिद्धांत विद्यार्थियों को कार्य स्वयं करके सीखने का अवसर देता है (Learning by doing)


7- लक्ष्य स्पष्ट होने से विद्यार्थी अधिक मनोयोग से प्रयास करता है


8- यह सिद्धांत विशेष रूप से उन कार्यों को सीखने में सहायक होता है जिनमें किसी कार्य को करने का एक विशेष तकनीक होती है जैसे फुटबॉल को किक मारना, क्रिकेट में बॉलिंग करना, वालीबाल अथवा टेनिस में सर्विस करना, जिमनास्टिक मूवमेंट करना, नृत्य, संगीत, टाइपिंग करना आदि


प्रयास और गलती के सिद्धांत की सीमाएं


  1. यह विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए तथा सीखने की प्रारंभिक अवस्था में अधिक प्रयोग किए जाने वाली विधि है
  2. यह एक यांत्रिकी विधि है जिसमें बौद्धिक क्षमता का कम प्रयोग होता है
  3. इसमें समय और शक्ति अधिक लग सकती है
  4. अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को यह प्रक्रिया धीमी एवं बोरिंग लग सकती है। 
  5. जटिल तकनीक सीखने के लिए यह सिद्धांत अधिक सहायक नहीं होता।



Comments

Popular posts from this blog

BA iii syllabus 1st Paper

लर्निंग कर्व (Learning Curve)