Massage मालिश (मसाज)
Massage
मालिश (मसाज)
- मसाज की परिभाषा
- मसाज का वर्गीकरण
- मसाज के तरीके
शरीर की मांसपेशियों एवं अन्य कोमल एवं कठोर ऊतकों की कमजोरी एवं थकान के उपचार हेतु मालिश करना एक प्रचलित तरीका है।
मालिश अथवा मसाज (massage) शरीर के अंगों को मलने, मसलने, सहलाने अथवा उनमें घर्षण करने की एक वैज्ञानिक कला एवं हस्त कौशल विधि है जिससे अंग की मांस पेशियों, लिगामेंट, टेंडन, संयोजी उत्तक, आंतों का रक्त संचार बढ़ जाता है जिससे अंग अधिक सक्रिय हो जाते हैं तथा उन्हें आराम मिलता है। मालिश (Massage) करना कायिक चिकित्सा (Physiotherapy) का मूल है
विश्व की लगभग सभी सभ्यताओं में मालिश करने के संदर्भ मिलते हैं । प्राचीन काल से ही अनेक प्रकार के जोड़ों के दर्द एवं कई असाध्य रोग जैसे लकवा, स्नायविक रोग, सिर दर्द आदि के उपचार में मालिश के द्वारा इलाज की अनुशंसा की जाती रही है।
आधुनिक चिकित्सा में मालिश करने के बहुत से उपकरणों का विकास हो चुका है परंतु हाथों के द्वारा की जाने वाली मालिश सर्वोत्तम मानी जाती है।
मालिश अर्थात मसाज (massage) शब्द की उत्पत्ति संभवत अरेबिक शब्द Massa से हुई है जिसका अर्थ स्पर्श करना एवं हाथों से रगड़ना होता है।
मालिश से लाभ
- मांस पेशियों का रक्त संचरण अच्छा होता है
- पेशियों को ऑक्सीजन की अधिक आपूर्ति होती है
- ऊतकों में निर्मित व्यर्थ पदार्थों जैसे लैक्टिक एसिड को हटाने में सहायक होता है
- चोट के पश्चात recovery में मालिश के प्रयोग से मांस पेशियों का तनाव, सूजन व ऐंठन कम करने में सहायक होती है
- त्वचा की टोन अच्छी होती है
- खिलाड़ी को प्रतियोगिता के लिए तैयार करने में सहायक होती है
- प्रशिक्षण कार्यक्रम में खिलाड़ियों की थकान दूर करने में सहायक है
- मालिश का प्रयोग पैसिव वार्म अप (Passive Warm up) के लिए भी किया जाता है
- खेल अभ्यास के बाद मांसपेशियों में उत्पन्न हुई थकान, अकड़न एवं दर्द में मालिश के द्वारा आराम मिलता है
- त्वचा की कांति में वृद्धि होती है
- पुरानी चोटों के कारण मसल्स एवं जोड़ों में उत्पन्न हुई अकड़न एवं अक्रियता को दूर किया जाता है।
मालिश के वर्गीकरण एवं मालिश के प्रकार
मालिश करने की विभिन्न तरीकों को 4 वर्गों में बांटा गया है
- सहलाने की हस्त कौशल विधि (Stroking)
- दबाव की हस्त कौशल विधि (Pressure)
- थपथपाने की हस्त कौशल विधि (Percussion)
- हिलाने एवं झकझोरने की हस्त कौशल विधि (Shaking)
1-सहलाने का हस्त कौशल विधि (Stroking स्ट्रोकिंग)
मालिश करने में यह सबसे सामान्य एवं ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली विधि है। इस विधि में मांस पेशियों को हाथ की उंगलियों अथवा हथेलियों द्वारा मांस पेशी की लंबवत दिशा में सहलाया एवं रगड़ा जाता है, जिसे स्ट्रोकिंग (Stroking) कहते हैं। विभिन्न प्रकार की स्ट्रोकिंग करने की विधियों के अनुसार उन्हें अलग अलग नाम दिए जाते हैं
सहलाना (एफ्लेराज Effleurage)
एफ्लेराज एक प्रकार की स्ट्रोकिंग विधि ही है। इस विधि में शरीर के अंग को दूर वाले भाग से हृदय की तरफ तरफ हथेली का प्रयोग कर सहलाने (Stroking) की विधि है जिससे शिराओं में हृदय की तरफ रक्त का संचरण बढ़ जाता है। इसमें त्वचा के ऊपर निरंतर दवाब के साथ एक ही तरफ (हृदय की तरफ) लयबद्ध तरीके से स्ट्रोकिंग की जाती है
2-दबाव की हस्त कौशल विधि (Pressure)
इस विधि में मालिश किए जाने वाले अंग पर उंगलियों, हथेली हाथ अथवा शरीर के भार द्वारा दवाब डाला जाता है
गूंथना (Kneading)
यह दबाव (pressure) द्वारा मालिश करने की विधि है। इस विधि में मालिश किए जाने वाले अंग पर वे सभी क्रियाएँ की जाती है जैसा कि आटा गूंथते समय करते हैं।
इसमें मुलायम उतकों को मुट्ठी से पकड़ना, उसे उठाना कर छोड़ देना तथा एक ही स्थान पर चक्रीय रूप से दबाना जैसी क्रियाएं की जाती हैं।
इसमें चार प्रकार की क्रियाएं होती है
निचोड़ना (Squeezing स्क्वीजिंग)
इस विधि में मालिश किए जाने वाले अंग की त्वचा को उंगलियों अथवा पूरे हाथ या दोनों हाथों से गहराई से पकड़कर दवाब के साथ (निचोड़ने के समान) ऊपर की ओर खींच कर छोड़ दिया जाता है यह प्रक्रिया कई बार लयबद्ध तरीके से दोहराई जाती है
एक ही स्थान पर दबाव देना (stationary Press स्टेशनरी प्रेस)
इस विधि में मालिश किए जाने वाले अंग की मांसपेशियों पर उंगलियों, अंगूठे, हथेली अथवा मुट्ठी के द्वारा गहराई तक दबाव डाला जाता है। कभी-कभी अधिक दबाव की आवश्यकता महसूस होने पर व्यक्ति अपनी से काफी कम वजन वाले व्यक्तियों (बच्चों) को अपने अंगों पर खड़ा कर लेते हैं जैसे कि नितंब, हैमस्ट्रिंग एवं पीठ वाले क्षेत्र में।
चक्रीय रूप से दबाना (Circular Pressing- सर्कुलर प्रेसिंग)
इसमें मालिश किए जाने वाले अंग की मांसपेशियों को उंगली अथवा हथेली से गहराई तक दबाने के बाद उसे चक्रीय रूप से घुमाया जाता है।
कपड़े इस्त्री करने के समान दबाना (Ironing- आयरनिंग)
इसमें पेशियों के ऊपर हथेली से दबाव डालने के साथ कपड़े पर इस्त्री करने के समान एक अथवा दोनों हाथों से पेशी की लंबाई में हाथ को रगड़ा जाता है। यह विधि शरीर की बड़ी मांस पेशियों जैसे पीठ, नितंब एवं हैमेस्ट्रिंग की पेशियों की मालिश के लिए उपयोग की जाती है।
3-चिकोटना (Petrissage- पैट्रिसाज)
इस विधि में मांस पेशियों को चिकोटी की तरह हाथ से पकड़ कर अस्थि से दूर ऊपर की तरफ खींचना (picking up), मरोड़ा (wringing up) अथवा लुढ़काने (rolling up) जैसी क्रियाएं की जाती है।
4-घर्षण (Friction- फ्रिक्शन)
इस विधि में उंगलियों, अंगूठे अथवा हथेली के द्वारा त्वचा की सतह पर गहराई तक दबाव डालते हुए रगड़ा जाता है। चारों उंगलियों और अंगूठी की सिरों से घर्षण की गति उत्पन्न करना सर्वोत्तम होता है।
5-थपथपाना (Percussion परकशन)
इस विधि में मालिश किए जाने वाले अंग को हाथ द्वारा थपथपाया जाता है। यह विधि अधिकांशतः शरीर की मांसल भाग पर की जाती है जिससे उस स्थान की मांस पेशियां उत्तेजित हो जाती हैं वे उनमें में संचार तेज हो जाता है जिससे मेटाबोलिक व्यर्थ उत्पाद के निकास में तेजी आती है।
थपथपाने की क्रिया प्राय: हाथों द्वारा की जाती है। थपथपाने के तरीके के अनुसार उसे अलग-अलग नाम दिए जाते हैं जैसे हैकिंग (Hacking), स्लैपिंग (Slapping), कपिंग (Cupping), बीटिंग (Beating) आदि
हैकिंग (Hacking)
इस विधि में हाथ की अनामिका उंगली की तरफ की सतह से मांसल भाग पर खड़ी हथेलियों द्वारा लयबद्ध तरीके से तेजी से लगातार प्रहार किया जाता है। आवश्यकता के अनुसार प्रहार की तीव्रता कम या अधिक हो सकती है।
स्लैपिंग (Slapping)
इस प्रक्रिया में पूरी हथेली से मालिश की जाने वाले स्थान को थपथपाया जाता है। यह थप्पड़ (Slapping) मारने जैसी क्रिया होती है।
कपिंग (Cupping)
यह स्लैपिंग (Slapping) से मिलती-जुलती विधि है परंतु इसमें हथेलियों को सपाट तरीके से मारने की बजाय हाथ की उंगलियों और हथेलियों से कप जैसी आकृति बनाकर अंग को हल्की अथवा जोर से थपथपाया जाता है। जिससे त्वचा की सतह पर मारते समय है तेज आवाज उत्पन्न होती है।
बीटिंग (Beating)
इस विधि में हाथों की मुट्ठियों द्वारा प्रभावित स्थान पर लगातार लयबद्ध तरीके से मुक्के मारे जाते हैं जिनकी तीव्रता आवश्यकतानुसार कम या अधिक हो सकती है
6-कम्पन (Vibration वाइब्रेशन)
इसमें मालिश किए जाने वाले स्थान पर अंगुलियों के सिरों अथवा हथेली के द्वारा दबाव डालते हुए तेजी से कंपन उत्पन्न किया जाता है। जिससे स्थानीय पेशियों अथवा ऊतकों में रक्त संचरण तेज हो जाता है।
7-झकझोना (Shaking शेकिंग )
यह कम्पन से मिलती-जुलती मालिश की विधि है जिसमें मालिश की जाने वाले स्थान पर दबाकर कम्पन उत्पन्न करने के बजाय प्रभावित अंग को एक सिरे से पकड़ कर उसे तेजी से इधर-उधर हिलाया अथवा झकझोरा जाता है। प्राय: इस विधि का उपयोग खिलाड़ी अभ्यास के बाद कूल डाउन करते समय अपने हाथों एवं पैरों को रिलैक्स करने के लिए करते हैं।
मालिश के समय रखी जाने वाली सावधानियां
- त्वचा पर घाव, फोड़े व फुंसी होने की दशा में मालिश नहीं करनी चाहिए
- रक्तस्राव होने की दशा में मालिश नहीं करनी चाहिए
- ताजा गंभीर चोट लगने पर मालिश तुरंत नहीं करनी चाहिए। पहले एक्स-रे अथवा अल्ट्रासाउंड द्वारा यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि कहीं फ्रैक्चर अथवा अंदरूनी रक्तस्राव तो नहीं है।
- मालिश करते समय उचित प्रकार की लुब्रिकेशन (Lubrication) का इस्तेमाल करना चाहिए नहीं तो अनावश्यक घर्षण द्वारा त्वचा छीन सकती है अथवा उसमें जलन उत्पन्न हो सकती है सकती है। सामान्य मसाज के लिए सरसों अथवा नारियल का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है परंतु कोमल अंगों की मसाज हेतु विशेष प्रकार की क्रीमों का उपयोग किया जा सकता है
- यदि मालिश किए जाने वाले अंग पर काफी बाल हो तो मालिश करने से पूर्व उस स्थान की शेविंग (shaving) कर देनी चाहिए, अन्यथा मालिश के दौरान बाल टूटने से काफी दर्द होता है एवं इंफेक्शन अथवा बाल-तोड़ भी हो सकता है
- मालिश के लिए प्रातः काल सूर्योदय के बाद से दोपहर से पहले तक के समय की धूप विशेष लाभकारी होती है
- भोजन के तुरंत बाद मालिश नहीं करनी चाहिए।
- मालिश करते समय रोगी के शरीर पर घर्षण पैदा करते समय या भार डालते समय रोगी की सहन क्षमता का ध्यान रखना चाहिए।
Comments
Post a Comment